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मंगलवार, 25 जुलाई 2023

(रायपुर) छत्तीसगढ़ की टीम ने तमिलनाडु के फारेस्ट स्कूल का दौरा किया

  • 26-Jul-2023

0-पश्चिमी घाट के मनोरम परिवेश में संचालित है कलारी फारेस्ट स्कूल

0-बच्चों पर नहीं रहता स्कूल बैग और किताबों का बोझ रायपुर, 26 जुलाई । दक्षिण भारतीय राज्य तमिलनाडु के पश्चिमी घाट के सुन्दर और मनोरम प्राकृतिक परिवेश में एक अनुकूल स्थान पर नयी पीढ़ी में पर्यावरण चेतना, समाज कल्याण, विश्व शांति और सामाजिक न्याय की गहरी समझ विकसित करने के लिए कलारी फारेस्ट स्कूल का संचालन किया जा रहा है। तमिल भाषा में कलारी शब्द का आशय सीखने की प्रक्रिया से है। कलारी फारेस्ट स्कूल की स्थापना एक युवा इलेक्ट्रिकल इंजीनियर योगेश कार्तिक द्वारा की गयी है। छत्तीसगढ़ के समाज -सेवियों की टीम ने डॉ. सत्यजीत साहू के नेतृत्व में कल तमिलनाडु प्रवास के दौरान कोडईकनाल इलाके में स्थित कलारी फारेस्ट स्कूल का दौरा किया। इसके संस्थापक योगेश कार्तिक ने स्कूल परिसर में लगाए गए शिविर में उन्हें बताया कि चार साल पहले कोडाइकनाल घाट रोड पर कलारी फ़ॉरेस्ट स्कूल की स्थापना 15 जून, 2019 को हुई थी। वर्तमान में प्रचलित शैक्षणिक पैटर्न में बच्चों पर पढ़ाई का मानसिक तनाव अधिक रहता है। ऐसे में इस क्षेत्र के बच्चों के लिए कलारी फ ारेस्ट स्कूल एक पेड़ की छाया की तरह है जो ज्ञान प्राप्ति की उनकी प्यास बुझाने के साथ -साथ उन्हें आराम और ताजग़ी देता है। यहाँ अध्ययनरत बच्चों पर स्कूल बैग और किताबों का बोझ नहीं रहता। इसके बिना भी वे बहुत सारी चीजें सीखते हैं। वे आकाश की महिमा का निरीक्षण करते हैं, वे अनुभवात्मक तरीके से पृथ्वी की जीवंतता और आसपास मौजूद हर चीज के महत्व को समझते हैं। योगेश कार्तिक ने डॉ सत्यजीत साहू और छत्तीसगढ़ की टीम को बताया कि कलारी फ़ारेस्ट विद्यालय के शिविर बच्चों के व्यक्तिगत कौशल को विकसित करने और आत्मविश्वास के साथ बढऩे के लिए हैं। शिविर में तमिलनाडु, केरल , और कर्नाटक से आए युवाओं के साथ छत्तीसगढ़ की टीम के सुनील शर्मा और संतोष ठाकुर ने भी विचार विनिमय किया । बच्चों से संवाद में डॉ सत्यजीत साहू ने कहा कि दुनिया में परिवर्तन लाने वाले बहुतेरे वैज्ञानिकों ने अपनी शिक्षा इसी तरीक़े से पाई है , जिनमें डारविन, लियोनार्ड डाविंची और रविंद्रनाथ टैगोर सहित कई महान विभूतियों के नाम लिए जा सकते हैं।डॉ. साहू ने बताया कि कलारी फ ारेस्ट स्कूल के संस्थापक योगेश कार्तिक एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर हैं जो समाज -सेवा की भावना से बच्चों के शिक्षक बन गए। इसके पहले एक निजी ऑटोमेशन कंपनी से काम शुरू करने के बाद उन्होंने अपनी स्टार्ट अप कम्पनी स्थापित करने के लिए नौकरी से इस्तीफा दे दिया। वर्ष 2013 में उन्होंने एक एकल-स्वामित्व वाली फर्म के रूप में एक सौर ऊर्जा स्थापना कंपनी की स्थापना की और बिजली संकट अवधि के दौरान कई सौर ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित की । इस बीच, योगेश ने समान विचारधारा वाले युवा समूहों के साथ कई पर्यावरण संरक्षण गतिविधियों में अपना योगदान दिया और समाज में प्रचलित कई सामाजिक और पर्यावरणीय मुद्दों के बारे में जानने के लिए खुद को तैयार और विकसित किया । तभी, उन्होंने अपनी सभी तकनीकी विशेषज्ञता को छोड़कर बच्चों की शिक्षा के क्षेत्र में प्रवेश करने का फैसला किया, जहां उन्होंने पर्यावरण और सामाजिक न्याय के बारे में चिंतित समाज बनाने के लिए शिक्षा को एकमात्र उपकरण के रूप में पाया।



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